उर्दू शायरी · ग़ज़ल

isi liye to musafir tu sogwar nahin

इसी लिए तो मुसाफ़िर तू सोगवार नहीं

اسی لئے تو مسافر تو سوگوار نہیں

शायर: Varun Anand7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इसी लिए तो मुसाफ़िर तू सोगवार नहीं
कि तू ने क़ाफ़िले देखें हैं पर ग़ुबार नहीं

नहीं ये बात नहीं है की तुझ से प्यार नहीं
मैं क्या करूँ कि मुझे ख़ुद पे ए'तिबार नहीं

लगा हूँ हाथ जो तेरे तो अब सँभाल मुझे
मैं एक बार ही मिलता हूँ बार बार नहीं

मुझे कुरेदने वालो मैं एक सहरा हूँ
कि मुझ से रेत ही निकलेगी आबशार नहीं

ग़मों से रिश्ता बना दोस्ती निभा उन से
दुखों को पाल मिरी जान उन को मार नहीं

मिरे क़ुबूल पे उस ने क़ुबूल कह तो दिया
पर एक बार कहा उस ने तीन बार नहीं

जहाँ तू बिछड़ा वहाँ गीत बज रहा था यही
मिरे नसीब में ऐ दोस्त तेरा प्यार नहीं