उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is uqda-e-la-harf ko hal kar liya jae

इस 'उक़्दा-ए-ला-हर्फ़ को हल कर लिया जाए

اس عقدۂ لا حرف کو حل کر لیا جائے

शायर: Yawar Azeem9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस 'उक़्दा-ए-ला-हर्फ़ को हल कर लिया जाए
ख़ामोशी को सुलझा के ग़ज़ल कर लिया जाए

उस यूसुफ़-ए-दौराँ से क़राबत न रखें हम
तज्वीज़-ए-अज़ीज़ाँ पे 'अमल कर लिया जाए

ऐसी भी मोहब्बत नहीं उस शख़्स से हम को
जिस के लिए आ'साब को शल कर लिया जाए

मुझ से तिरी चूड़ी की खनक पूछ रही है
दरयाफ़्त कोई प्यार का पल कर लिया जाए

इस 'अह्द-ए-फ़लाकत में यही बात बहुत है
ता'मीर कोई ख़्वाब-महल कर लिया जाए

वैसे तो मुझे शौक़ नहीं कार-ए-जुनूँ का
तू प्यार से कहती है तो चल कर लिया जाए

हर मसअले पर बात ही करते न रहें हम
बेहतर है कोई मसअला हल कर लिया जाए

दिल को तिरी दूरी से 'अजब ठेस लगी थी
बदला तिरे होंटों को कुचल कर लिया जाए

बे-'इश्क़-ए-बुताँ 'उम्र गुज़ारी नहीं जाती
अच्छा है कि पैदा ये ख़लल कर लिया जाए