उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is tarah TuT kar gira pani

इस तरह टूट कर गिरा पानी

اس طرح ٹوٹ کر گرا پانی

शायर: Zafar Zaidi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस तरह टूट कर गिरा पानी
बादलों में नहीं बचा पानी

घर बनाया तो था बुलंदी पर
फिर भी आँगन में भर गया पानी

लड़-झगड़ कर कभी तो आग बना
और कभी बर्फ़ बन गया गया पानी

मुझ को अपने ही शहर का यारो
रास आया नहीं हवा पानी

लोग दीवाना-वार टूट पड़े
मुद्दतों बा'द जब मिला पानी

हाथ थामे हुए हवाओं का
रास्ते में हमें मिला पानी

एक भी बूँद खेत को न मिली
सब हवाओं ने पी लिया पानी

ले के चुल्लू में मैं ने फेंक दिया
मुँह मिरा देखता रहा पानी

मुद्दतों से मैं तिश्ना-लब था 'ज़फ़र'
फिर भी सब को पिला दिया पानी