उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is se phulon wale bhi aajiz aa gae hain

इस से फूलों वाले भी 'आजिज़ आ गए हैं

اس سے پھولوں والے بھی عاجز آ گئے ہیں (ردیف .. ے)

शायर: Idris Babar18 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस से फूलों वाले भी 'आजिज़ आ गए हैं
तेरी ख़ातिर जो गुलदस्ता ढूँढ़ रहा है

दिल को धक्के खाते निकाले जाते देख के
साहिल अपना पक्का दरिया ढूँढ़ रहा है

तस्मा खुला जैसे आज़ाद तलाज़मा हो वाह
एक पहन के दूसरा जूता ढूँढ़ रहा है

उस के फ़्लैट से बाहर कोई दूर का दोस्त
पास के बस स्टाप का रस्ता ढूँढ़ रहा है

बस कर दे अब कब से मतला' ढूँढ़ रहा है
क्या कोई तीसरा चौथा मिसरा' ढूँढ़ रहा है

एम-ए किए बिंत-ए-मोची को चौथा साल है
तब से वो जॉब और कर्मू रिश्ता ढूँढ़ रहा है

हर मसनू'ई पंखा झूटा मेक-अप कर के
ज़ात की शहर-पनाह में रख़्ना ढूँढ़ रहा है

लैम्प जलाते और बुझा के फिर से जलाते
या वो मुझे गुम करता है या ढूँढ़ रहा है

पार्टी ठप मेहमान-ए-ख़ुसूसी शा'इर-ए-आ'ज़म
पतली गली में पान का खोखा ढूँढ़ रहा है

यारो बैठे नहरें खोदो बातें छोड़ो
मैं उसे ढूँढ़ लूँ मुझे जो तन्हा ढूँढ़ रहा है

इक लड़की अपने लिए लड़की ढूँढ़ रही है
इक लड़का अपने लिए लड़का ढूँढ़ रहा है

मोबाइल पर ऐप लगाओ काम चलाओ
कौन पुराने शहर का नक़्शा ढूँढ़ रहा है

रोज़े रखवाओ खुलवाओ जन्नत पाओ
बंदा तो दो वक़्त का खाना ढूँढ़ रहा है

मेरी इकलौती टी-शर्ट पे क़ब्ज़ा जमाए
अच्छा रूममेट अपना कच्छा ढूँढ़ रहा है

खिल-खिला के लोड-शेडिंग से फ़ैज़ उठा के
यूसुफ़-जानी तुझे ये अंधा ढूँढ़ रहा है

गदले पानी से धुलते स्टेशन पर किस को
गर्मा-गर्म सी चाय का पियाला ढूँढ़ रहा है

सीने पर दो क़ब्रों के ता'वीज़ बंधे हैं
बच कर धूप मुझे इक साया ढूँढ़ रहा है

यू-ई-टी में छुट्टियाँ होने वाली हैं दोस्त
कौन सा हॉस्टल किस का कमरा ढूँढ़ रहा है