उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is ka to gham nahin dil-e-diwana jal gaya

इस का तो ग़म नहीं दिल-ए-दीवाना जल गया

اس کا تو غم نہیں دل دیوانہ جل گیا

शायर: Habeeb Ahmad Siddiqui7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस का तो ग़म नहीं दिल-ए-दीवाना जल गया
ज़ालिम ये ग़म है तेरा सनम-ख़ाना जल गया

बेदाद रश्क से दिल-ए-दीवाना जल गया
सद-हैफ़ हम न जल गए परवाना जल गया

शायद सफा-ए-हुस्न में मुज़्मर थीं रंजिशें
आग़ोश-ए-इल्तिफ़ात में परवाना जल गया

साक़ी की चश्म-ए-नाज़ से निस्बत है क्या उसे
बस इक निगाह-ए-गर्म में पैमाना जल गया

हंगामा-ए-हयात हुआ ख़त्म उस के साथ
अब कोई क्या जिए दिल-ए-दीवाना जल गया

आतिश सरिश्त-ए-शम्अ है या है इताब-ए-हुस्न
हम इतना जानते हैं कि परवाना जल गया

तेरे करम से दिल पे जो गुज़री वो क्या कहें
सहबा-ए-आतिशीं से ये पैमाना जल गया