उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is andhere mein kahan taza KHayal aaega

इस अंधेरे में कहाँ ताज़ा ख़याल आएगा

اس اندھیرے میں کہاں تازہ خیال آئے گا

शायर: Aamir Azher5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस अंधेरे में कहाँ ताज़ा ख़याल आएगा
चाँद निकलेगा तो दरिया में उछाल आएगा

बैठिए आप कि मुझ से नहीं बैठा जाता
इस तवक़्क़ो' पे कि पानी में उबाल आएगा

जाते जाते ही ज़माने की रविश जाएगी
आते आते ही उन्हें मेरा ख़याल आएगा

इस लिए बैठा हूँ मैं सत्ह पे बे-ख़ौफ़ हुज़ूर
मुझ को मा'लूम है किस सम्त से जाल आएगा

आह उट्ठेगी तो रह रह के उठेगी 'आमिर'
काम ऐसा है कि कर कर के कमाल आएगा