उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ilahi tu meri taqdir ko tanhaiyan de de

इलाही तू मिरी तक़दीर को तन्हाइयाँ दे दे

الٰہی تو مری تقدیر کو تنہائیاں دے دے

शायर: Ejaz Ansari5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इलाही तू मिरी तक़दीर को तन्हाइयाँ दे दे
मगर उस की शबों को अंजुमन-आराइयाँ दे दे

दिलों को जज़्बा-ए-‘इश्क़-ओ-मुहब्बत बख़्शने वाले
उसे मशहूर कर दे और मुझे रुस्वाइयाँ दे दे

अगर मेरे त'अल्लुक़ से कोई पैग़ाम देना है
तो लहजे को असर और फ़िक्र को गहराइयाँ दे दे

दर-ओ-दीवार की ये बे-हिसी कब तक सहूँ आख़िर
मिरी ख़ल्वत को भी कुछ 'अक्स कुछ परछाइयाँ दे दे

उदासी तुझ से जब 'ए'जाज़' देखी ही नहीं जाती
तो फिर इस ग़म-ज़दा माहौल को शहनाइयाँ दे दे