उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek shajar aisa mohabbat ka lagaya jae

इक शजर ऐसा मोहब्बत का लगाया जाए

اک شجر ایسا محبت کا لگایا جائے

शायर: Zafar Zaidi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक शजर ऐसा मोहब्बत का लगाया जाए
जिस का हम-साए के आँगन में भी साया जाए

ये भी मुमकिन है बता दे वो कोई काम की बात
इक नुजूमी को चलो हाथ दिखाया जाए

देखना ये है कि कौन आता है साया बन कर
धूप में बैठ के लोगों को बुलाया जाए

या मिरी ज़ीस्त के आसार नुमायाँ कर दे
या बता दे कि तुझे कैसे भुलाया जाए

उस के एहसान से इंकार नहीं है लेकिन
नक़्श पानी पे 'ज़फ़र' कैसे बनाया जाए