उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek pareshani alag thi aur pashemani alag

इक परेशानी अलग थी और पशेमानी अलग

اک پریشانی الگ تھی اور پشیمانی الگ

शायर: Tafzeel Ahmad8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक परेशानी अलग थी और पशेमानी अलग
'उम्र भर करते रहे हम दूध और पानी अलग

रेत ही दोनों जगह थी ज़ेर-ए-मेहर-ओ-ज़ेर-ए-आब
मिस्र'अ-ए-ऊला से कब था मिसरा'-ए-सानी अलग

दश्त में पहले ही रौशन थी बबूलों पर बहार
दे रहे हैं शहर में काँटों को सब पानी अलग

कुछ कुमक चाही तो ज़म्बील-ए-हवा ख़ाली मिली
घाटियों में खो गया नक़्श-ए-सुलैमानी अलग

रेत समझौते की ख़ातिर नाचती है धूप में
बादलों की ज़िद जुदा है मेरी मन-मानी अलग

मुद्द'ई हैं बर्फ़ बालू रात काँटे तप हवा
जिस्म पर है फ़ौजदारी जाँ पे दीवानी अलग

वो फ़लक संगीत में मिट्टी की धुन तो क्या हुआ
सारे-गामा से कहीं होता है पाधानी अलग

फ़न में ताक़त-वर बहाव चश्म-ए-दो-आबा का है
'ज़ेब-ग़ौरी' से कहाँ 'तफ़ज़ील' हैं 'बानी' अलग