उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek ik ko itab banTte ho

इक इक को इताब बाँटते हो

اک اک کو عتاب بانٹتے ہو

शायर: Parveen Fana Syed5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक इक को इताब बाँटते हो
किस तरह के ख़्वाब बाँटते हो

हर चेहरे पे झुर्रियाँ लिखी हैं
तुम कैसा शबाब बाँटते हो

फ़िरदौस तुम्हारे हाथ में है
बंदों को अज़ाब बाँटते हो

इक एक कली का रंग फ़क़ है
ये कैसे गुलाब बाँटते हो

आँखों में तो रतजगे लिखे हैं
तुम समझे कि ख़्वाब बाँटते हो