उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek hawa si koi ruki hui hai

इक हवा सी कोई रुकी हुई है

اک ہوا سی کوئی رکی ہوئی ہے

शायर: Zafar Iqbal8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक हवा सी कोई रुकी हुई है
कभी चलती कभी रुकी हुई है

मेरे उस के है बीच में दुनिया
और सब रौशनी रुकी हुई है

रास्ते हैं खुले हुए सारे
फिर भी ये ज़िंदगी रुकी हुई है

चलती रुकती सी दिल की ये धड़कन
चल पड़ेगी अभी रुकी हुई है

सिलसिला जो रवाँ है नेकी का
उस के पीछे बदी रुकी हुई है

आप ही चल पड़ेगी ये किसी वक़्त
ये घड़ी आप ही रुकी हुई है

बात क्या है कि आज कल अपनी
सारी जादूगरी रुकी हुई है

पस-ए-गिर्या है वो भी साफ़ 'ज़फ़र'
जो हँसी आप की रुकी हुई है