उर्दू शायरी · ग़ज़ल

huzur khel hai ya phir Darama-bazi hai

हुज़ूर खेल है या फिर डरामा-बाज़ी है

حضور کھیل ہے یا پھر ڈرامہ بازی ہے

शायर: Aarif Nazeer9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हुज़ूर खेल है या फिर डरामा-बाज़ी है
तुम्हारा प्यार बिल-आख़िर डरामा-बाज़ी है

मैं उल्टे पाँव पलट जाऊँ तेरी बज़्म से क्या
अगरचे मेरी ही ख़ातिर डरामा-बाज़ी है

वो जिस को लफ़्ज़ बरतना तलक नहीं आता
बना हुआ है वो शा'इर डरामा-बाज़ी है

ये किस लिए तिरे किरदार सर-फिरे हुए हैं
ये किस ड्रामे की ख़ातिर डरामा-बाज़ी है

अगरचे 'इल्म है लेकिन 'अमल नहीं कोई
ड्रामे-बाज़ है ज़ाकिर डरामा-बाज़ी है

सभों को ख़ूब हिदायत मिली पस-ए-पर्दा
सब अपने फ़न में हैं माहिर डरामा-बाज़ी है

'अदू से कह दो तमाशा न अब करे कोई
हमारे यार हैं ज़ाहिर डरामा-बाज़ी है

सभी तो थोप चुके हम पे अपनी तहज़ीबें
हम अब तलक हैं मुहाजिर डरामा-बाज़ी है

सफ़ेद मोम के जैसा है तेरा दिल 'आरिफ़'
दिखाई देता है शातिर डरामा-बाज़ी है