उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hunar-e-ghaib ki tafsir bane baiThe hain

हुनर-ए-ग़ैब की तफ़्सीर बने बैठे हैं

ہنر غیب کی تفسیر بنے بیٹھے ہیں

शायर: Lucky farooqi Hasrat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हुनर-ए-ग़ैब की तफ़्सीर बने बैठे हैं
सब यहाँ 'मीर' तक़ी 'मीर' बने बैठे हैं

मेरे कमरे की ख़मोशी का गिला वाजिब है
आप तस्वीर में तस्वीर बने बैठे हैं

अपने उलझे हुए बालों को सँवारो जानाँ
ये मिरे पाँव की ज़ंजीर बने बैठे हैं

इतनी ऊँची है मिरे सर पे रखी क़ीमत कि
गुल-सिफ़त लोग भी शमशीर बने बैठे हैं

दिल के गुल-मर्ग में गिरती है तिरी याद की बर्फ़
हम तिरे हिज्र में कश्मीर बने बैठे हैं