उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ho sakta hun sharabi kar

हो सकता हूँ शराबी कर

ہو سکتا ہوں شرابی کر

शायर: Zafar Iqbal8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हो सकता हूँ शराबी कर
पहले मुझे कबाबी कर

वक़्त नहीं बाक़ी इतना
सारा काम शिताबी कर

असली वस्ल करा अब तो
और नहीं बद-ख़्वाबी कर

ऊपर है सारा प्रसाद
नीचे ज़रा रकाबी कर

साथ बहा ले जा सब कुछ
मुलाक़ात सैलाबी कर

चेहरा खोल के बाहर आ
मौसम ज़रा गुलाबी कर

टख़ने तो दिखला पूरे
लहँगा ज़रा वहाबी कर

छोड़ ज़बानी बात 'ज़फ़र'
कोई काम किताबी कर