उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har su mausam nur pe tha jab miladon sat-sangon ka

हर सू मौसम नूर पे था जब मीलादों सत-सँगों का

ہر سو موسم نور پہ تھا جب میلادوں ست سنگوں کا

शायर: Parwez Rahmani6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर सू मौसम नूर पे था जब मीलादों सत-सँगों का
था झंकार पे राग बसंती सूफ़ी सुन्नत मलँगों का

घर घर नचने नाच रहे हैं महानगर के तालों पर
गाँव के बारह-मासों में दम टूट गया मरदंगों का

मेरे अहद के बच्चे हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई हैं
अमन की बगिया में है अब तो हर पल मौसम दंगों का

क्या ख़ुश-मर्ज़ी थी लोगों पर लोगाँ जीते मरते थे
दिल वालों की बस्ती में अब क़ब्ज़ा है मन-तंगों का

मुल्क मुल्क दुर्योधन महशर-सामानी पर आमादा
नील गगन बनता जाए मैदान सितारा जंगों का

राजाओं का देस था घर घर हाथी झूमा करते थे
आज वही भारत 'रहमानी' मुल्क है भूखों नंगों का