उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har KHushi ko ghamon mein Dhaala hai

हर ख़ुशी को ग़मों में ढाला है

ہر خوشی کو غموں میں ڈھالا ہے

शायर: Kailash Mahir4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर ख़ुशी को ग़मों में ढाला है
आरज़ूओं का बोल-बाला है

अपना साया भी अजनबी होगा
आख़िरी मोड़ आने वाला है

मिलना चाहो तो सौ बहाने हैं
वर्ना हर मोड़ पर उजाला है

वास्ता उन उदास लम्हों का
हम ने हर हादसे को पाला है