उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har hujjat hila chhoD diya

हर हुज्जत हीला छोड़ दिया

ہر حجت حیلہ چھوڑ دیا

शायर: Zafar Iqbal8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर हुज्जत हीला छोड़ दिया
लफ़्ज़ों को ढीला छोड़ दिया

सूरज की तरह ग़ुरूब हुए
धरती को गीला छोड़ दिया

कहीं झाड़ू दिया सफ़ाई से
कहीं तिनका तीला छोड़ दिया

फीके पकवान की हसरत में
सालन मिरचीला छोड़ दिया

उस तेज़ हरे हरियाले पर
कुछ पीला पीला छोड़ दिया

ऊपर तारीकी सी कर के
नीचे चमकीला छोड़ दिया

घर में तो ख़ूब किफ़ायत की
बाहर ख़र्चीला छोड़ दिया

चुभता ही रहा दिन रात 'ज़फ़र'
क्या शे'र नुकीला छोड़ दिया