उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har chand usne KHugar-e-azar kar diya

हर चंद उस ने ख़ूगर-ए-आज़ार कर दिया

ہر چند اس نے خوگر آزار کر دیا

शायर: Habeeb Ahmad Siddiqui7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर चंद उस ने ख़ूगर-ए-आज़ार कर दिया
नग़्मात-ए-ज़िंदगी को तो बेदार कर दिया

मा'सूमियत निगाह-ए-करम की सितम हुई
उल्फ़त का ए'तिबार में इज़हार कर दिया

फिर उस की याद आई लिए गुल्सितान-ए-शौक़
फिर आरज़ू को तिश्ना-ए-दीदार कर दिया

उस ने ब-यक-निगाह ख़रीदे दिल-ओ-जिगर
होश-ओ-ख़िरद को नज़्र-ए-ख़रीदार कर दिया

दिल गंज-ए-बे-बहा सही लेकिन तिरे लिए
हम ने तो सर्फ़-ए-रौनक़-ए-बाज़ार कर दिया

हर जुर्म-ए-इश्क़ फ़ख़्र है मेरे लिए मगर
उस की निगाहें देख के इंकार कर दिया

हसरत भरी नज़र वो किसी की दम-ए-विदाअ'
मरना भी मेरे वास्ते दुश्वार कर दिया