उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har aadmi mein talluq ki bhuk paida kar

हर आदमी में तअल्लुक़ की भूक पैदा कर

ہر آدمی میں تعلق کی بھوک پیدا کر

शायर: Yawar Azeem5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर आदमी में तअल्लुक़ की भूक पैदा कर
तू ख़ुद में आदत-ए-हुस्न-ए-सुलूक पैदा कर

ख़याल-ओ-ख़्वाब को मैकानिकी अमल न बना
ये ज़िंदगी है कोई भूल चूक पैदा कर

तुझे सुख़न की इजाज़त खड़ी शरीफ़ से हो
ग़ज़ल में नुदरत-ए-सैफ़-उल-मुलूक पैदा कर

ख़ज़ाने से यूँही ख़ाली न रख तिजोरी को
दिल-ए-तही में मोहब्बत की हूक पैदा कर

फ़ज़ा-ए-जब्र तिरे बोलने से काँप उठे
तू ज़ख़्म ज़ख़्म गले से वो कूक पैदा कर