उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hanuz zindagi-e-talKH ka maza na mila

हनूज़ ज़िंदगी-ए-तल्ख़ का मज़ा न मिला

ہنوز زندگیٔ تلخ کا مزہ نہ ملا

शायर: Yagana Changezi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हनूज़ ज़िंदगी-ए-तल्ख़ का मज़ा न मिला
कमाल-ए-सब्र मिला सब्र-आज़मा न मिला

मिरी बहार-ओ-ख़िज़ाँ जिस के इख़्तियार में है
मिज़ाज उस दिल-ए-बे-इख़्तियार का न मिला

हवा के दोश पे जाता है कारवान-ए-नफ़स
अदम की राह में कोई पियादा-पा न मिला

बस एक नुक़ता-ए-फ़र्ज़ी का नाम है का'बा
किसी को मरकज़-ए-तहक़ीक़ का पता न मिला

उमीद-ओ-बीम ने मारा मुझे दो-राहे पर
कहाँ के दैर-ओ-हरम घर का रास्ता न मिला

ब-जुज़ इरादा-परस्ती ख़ुदा को क्या जाने
वो बद-नसीब जिसे बख़्त-ए-ना-रसाना मिला

निगाह-ए-'यास' से साबित है सई-ए-ला-हासिल
ख़ुदा का ज़िक्र तो क्या बंदा-ए-ख़ुदा न मिला