उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hanuz dard-e-judai-e-yar baqi hai

हनूज़ दर्द-ए-जुदाई-ए-यार बाक़ी है

ہنوز درد جدائیٔ یار باقی ہے

शायर: Yagana Changezi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हनूज़ दर्द-ए-जुदाई-ए-यार बाक़ी है
खटक रहा था जो दिल में वो ख़ार बाक़ी है

न क़ैस है न वो महमिल-सवार बाक़ी है
बस इक ग़ुबार फ़क़त यादगार बाक़ी है

शराब-ए-ऐश किसी शब हुई थी मुझ को नसीब
उसी शराब का अब तक ख़ुमार बाक़ी है

कभी तो शाम-ए-मुसीबत की सुब्ह आएगी
अगर ये गर्दिश-ए-लैल-ओ-नहार बाक़ी है

निगाह-ए-लुत्फ़ से साक़ी हमीं रहें महरूम
उधर भी देख इक उम्मीद-वार बाक़ी है

बहार आएगी फिर 'यास' ना-उमीद न हो
अभी तो गुलशन-ए-ना-पाएदार बाक़ी है