उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hamein talash kisi ki nahin koi mil jae

हमें तलाश किसी की नहीं कोई मिल जाए

ہمیں تلاش کسی کی نہیں کوئی مل جائے

शायर: Zafar Iqbal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हमें तलाश किसी की नहीं कोई मिल जाए
मगर मिले तो मिले आज ही अभी मिल जाए

यही बहुत है इसी पर गुज़ारा कर लेंगे
वो चूमने को नहीं देखने को ही मिल जाए

हमें अभी उसे तफ़्सील से नहीं मिलना
किसी दिन आए यहाँ और सरसरी मिल जाए

उसी से काम चला लेंगे जोड़-जाड़ के हम
अगर कहीं कोई ख़्वाहिश कटी-फटी मिल जाए

गुज़र रही है अँधेरों में भी हमारी मगर
है क्या ही बात जो थोड़ी सी रौशनी मिल जाए

भरा है शह्र मगर ये भी शर्त है कि तुम्हें
मिरे समेत अगर कोई आदमी मिल जाए

अब उस का शुक्र अदा कीजिए कि शिकवा 'ज़फ़र'
जो राह चलते मुसीबत कोई नई मिल जाए