उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hamari aankh udasi se lal kab tak ho

हमारी आँख उदासी से लाल कब तक हो

ہماری آنکھ اداسی سے لال کب تک ہو

शायर: Aarif Nazeer6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हमारी आँख उदासी से लाल कब तक हो
तुम्हारे जाने का आख़िर मलाल कब तक हो

किसी भी रोज़ उमड आएगी ये बेज़ारी
बताओ इतना ज़ियादा ख़याल कब तक हो

तग़य्युरात-ए-ज़माना है लुत्फ़ लेते रहो
हमारी बात यूँही हस्ब-ए-हाल कब तक हो

हटा रहे हैं त'अल्लुक़ पे जो जमी है गर्द
वो राब्तों का तसलसुल बहाल कब तक हो

उदासी और कहीं भी हमें बुलाती है
बस इक जगह पे मुसलसल धमाल कब तक हो

मिलेगा ईंट का उन को जवाब पत्थर से
मैं मुंतज़िर हूँ कि 'आरिफ़' सवाल कब तक हो