उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hamare shahr mein ghar is liye sunsan rahte hain

हमारे शहर में घर इस लिए सुनसान रहते हैं

ہمارے شہر میں گھر اس لیے سنسان رہتے ہیں

शायर: Tahir Saood Kiratpuri9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हमारे शहर में घर इस लिए सुनसान रहते हैं
कि घर घर ख़ौफ़ से सहमे हुए इंसान रहते हैं

अगर तुम इश्क़ की मस्जिद में जाना ठान ही बैठे
तो बर-ख़ुरदार सीखो उस के क्या अरकान रहते हैं

मुझे मालिक मिरे बच्चों के हर ग़म से बचा लेना
लब-ए-दिल पर वही बन कर मिरे मुस्कान रहते हैं

मुझे कोई दिखा कर ख़्वाब में मेरा नगर बोला
यहाँ ला-हौल विर्द-ए-ख़ास रख शैतान रहते हैं

मोहब्बत वो मुक़द्दस चीज़ है सुन ऐ दिल-ए-नादाँ
वो मिल जाए तो राहत के बड़े इम्कान रहते हैं

वही दिल मो'तबर मुफ़्ती है अहल-ए-दीं की दुनिया में
कि जिस में ऐ ज़माने मुत्तक़ी अरमान रहते हैं

मिरी बस्ती पे हरगिज़ क़हर बरपा हो नहीं सकता
मिरी बस्ती में घर घर साहिब-ए-ईमान रहते हैं

मियाँ शोहरत भी अक्सर आदमी पे ज़ुल्म ढाती है
वही अच्छे हैं दुनिया में जो कम पहचान रहते हैं

यहाँ हर बात आँखों के इशारे से करो 'ताहिर'
लगे दीवार से हर वक़्त कितने कान रहते हैं