उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum waqt ke alaw mein barson jale miyan

हम वक़्त के अलाव में बरसों जले मियाँ

ہم وقت کے الاؤ میں برسوں جلے میاں

शायर: Qaisarul Jafri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम वक़्त के अलाव में बरसों जले मियाँ
लो दिल की राख छोड़ के हम भी चले मियाँ

चारों तरफ़ से टूट रहा है हवा का शोर
बस्ती में इक चराग़ कहाँ तक जले मियाँ

इक दूसरे के क़त्ल में हम सब शरीक हैं
पूछो तो कोई नाम किसी का न ले मियाँ

दरवाज़ा बंद कर के सुलगना पड़ा मुझे
क्यूँ मेरे घर की आग से बस्ती जले मियाँ

कब तक खड़े रहोगे दरख़्तों की आड़ में
क्या जाने कितनी देर ये आँधी चले मियाँ

वो दिन गए कि रहते थे हम आसमान पर
कटती है रात टूटी हुई छत तले मियाँ

'क़ैसर' भरी-बहार से रूठे रहे बहुत
अब फ़स्ल जा रही है लगा लो गले मियाँ