उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum tum hain jo ek phir judai kaisi

हम तुम हैं जो एक फिर जुदाई कैसी

ہم تم ہیں جو ایک پھر جدائی کیسی

शायर: Pandit Daya Shankar Naseem Lakhnawi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम तुम हैं जो एक फिर जुदाई कैसी
दिल ही न मिला तो आश्नाई कैसी

काफ़िर न घमंड रख ख़ुद-आराई का
सब कुछ हों जो बुत तो फिर ख़ुदाई कैसी

निय्यत में तो है कि पाऊँ सहबा-ए-तहूर
ऐ शैख़ ये तेरी पारसाई कैसी

कहता था वो बद-ज़बान है मत छेड़ 'नसीम'
चपती तो न होगी क्यों सुनाई कैसी