उर्दू शायरी · ग़ज़ल

humne TuTte KHwab ko yun aankh mein pas-andaz likha

हम ने टूटते ख़्वाब को यूँ आँख में पस-अंदाज़ लिखा

ہم نے ٹوٹتے خواب کو یوں آنکھ میں پس انداز لکھا

शायर: Yasir Iqbal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम ने टूटते ख़्वाब को यूँ आँख में पस-अंदाज़ लिखा
सर्फ़-ए-नज़र के हाशिए में आँसू को हमराज़ लिखा

सब्ज़ ख़याल के तकिए पर नई-नवेली छाप लगी
जब पलकों के धागों से काढ़ा तो गुल-नाज़ लिखा

सुब्ह-ए-तवज्जोह होते ही जब चेहरे का फूल खिला
रंग-ओ-बू के माथे पर झुक कर जा-ए-नमाज़ लिखा

प्यासी रेत की लहरों से फूटी 'इबारत पानी की
जादूगरान-ए-सहरा ने बस दरिया-पर्दाज़ लिखा

शहरिय्यत की ईंटों से जब भी दिल ता'मीर किया
दीवारों की क़िस्मत में दरवाज़ों का नाज़ लिखा

हम लौह-ए-महफ़ूज़ में थे नक़्ल-ए-मकानी वाजिब थी
सो बाब-ए-हिजरत खोला और नशेब-ओ-फ़राज़ लिखा

इक शोरीदा-लफ़्ज़ी सी हर सफ़्हे पर उड़ी फिरी
लिखने में जो नहीं आया आख़िर वो अंदाज़ लिखा