उर्दू शायरी · ग़ज़ल

humne likkhe the hawaon mein fasane apne

हम ने लिक्खे थे हवाओं में फ़साने अपने

ہم نے لکھے تھے ہواؤں میں فسانے اپنے

शायर: Qaisarul Jafri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम ने लिक्खे थे हवाओं में फ़साने अपने
उड़ गए एक ही झोंके में ज़माने अपने

सूनी आँखों में तलाशो न वफ़ा के मोती
हम लुटा आए कहीं और ख़ज़ाने अपने

बंद पलकों पे ये किस दर्द ने दस्तक दी है
टूट जाएँ न कहीं ख़्वाब सुहाने अपने

हम दरीचे पे खड़े हो के कहाँ तक सोचें
चाँद हर रोज़ बदलता है ठिकाने अपने

कौन परवाना बने कौन जले किस के लिए
शम्अ' ख़ुद बैठ के अब रोए सिरहाने अपने

हम ने तोड़ा नहीं माज़ी से त'अल्लुक़ 'क़ैसर'
हर नए शे'र में आँसू हैं पुराने अपने