उर्दू शायरी · ग़ज़ल

humne har gham dil-e-sad-chaak se bahar rakkha

हम ने हर ग़म दिल-ए-सद-चाक से बाहर रक्खा

ہم نے ہر غم دل صد چاک سے باہر رکھا

शायर: Qamar Raza Shahzad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम ने हर ग़म दिल-ए-सद-चाक से बाहर रक्खा
आग को पैरहन-ए-ख़ाक से बाहर रक्खा

ज़ेब-ए-तन हम ने भी कर रक्खी ये दुनिया लेकिन
तेरे हर रंग को पोशाक से बाहर रक्खा

ख़्वाब-दर-ख़्वाब तुझे ढूँडने वालों ने भी अब
नींद को दीदा-ए-नमनाक से बाहर रक्खा

इक तरह ध्यान ही ऐसा कि जिसे हम ने यहाँ
नफ़अ' नुक़सान के पेचाक से बाहर रक्खा

उजरत-ए-इश्क़ बहुत कम थी सौ हम ने 'शहज़ाद'
दिल को इस तंगी-ए-अफ़्लाक से बाहर रक्खा