उर्दू शायरी · ग़ज़ल

humne dekhe zindagi mein chand aise sar-phire

हम ने देखे ज़िंदगी में चंद ऐसे सर-फिरे

ہم نے دیکھے زندگی میں چند ایسے سرپھرے

शायर: Badr Jamali7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम ने देखे ज़िंदगी में चंद ऐसे सर-फिरे
दुश्मनों में जो पयाम-ए-दोस्ती ले कर फिरे

वाए ये तहत-ए-शु'ऊर अपना बला सा बन गया
अपनी आँखों में बड़े नादीदनी मंज़र फिरे

जब भी वो आए खुली ऐश-ओ-तरब की चाँदनी
दिन मिरे ज़ुल्मत-कदे के इस तरह अक्सर फिरे

क्या कोई शहर-ए-तमन्ना फिर उजड़ कर बस गया
जाबिरान-ए-वक़्त क्यों ख़ंजर लिए घर घर फिरे

शब को अक्सर हम-सफ़र थी ठंडी ठंडी चाँदनी
दिन को हम जलता हुआ सूरज लिए सर पर फिरे

नींद क्या आती शब-ए-हिज्राँ के इस माहौल में
हम कभी बैठे कभी उठ्ठे कभी उठ कर फिरे

दम ग़नीमत है 'जमाली' आप का इस दौर में
अब ज़माने में कहाँ हैं आप जैसे सर-फिरे