उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum apne ko fash kar rahe hain ai dahr

हम अपने को फ़ाश कर रहे हैं ऐ दहर

ہم اپنے کو فاش کر رہے ہیں اے دہر

शायर: Ijtiba Rizvi2 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम अपने को फ़ाश कर रहे हैं ऐ दहर
दिल नज़र ख़राश कर रहे हैं ऐ दहर

कैसा ये जुनून है कि तेरे अंदर
हम ख़ुद को तलाश कर रहे हैं ऐ दहर