उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hai nazar mein jo baal shishe ka

है नज़र में जो बाल शीशे का

ہے نظر میں جو بال شیشے کا

शायर: Aarif Nazeer7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

है नज़र में जो बाल शीशे का
क्या यही है ज़वाल शीशे का

तू ने पत्थर पे रख दिया कैसे
दिल है मेरा सँभाल शीशे का

हश्र बरपा है पत्थरों का जनाब
थोड़ा रखिए ख़याल शीशे का

मुँह हक़ीक़त से क्या छुपाता है
ख़ौफ़ दिल से निकाल शीशे का

टूट कर एक से अनेक हुआ
बस यही है कमाल शीशे का

तुम ने पत्थर से दोस्ती कर ली
कुछ तो रखते ख़याल शीशे का

पत्थरों के जहान में 'आरिफ़'
पड़ने वाला है काल शीशे का