उर्दू शायरी · ग़ज़ल

haalat-e-dil wahi rahi maqsad-e-dil ko pa ke bhi

हालत-ए-दिल वही रही मक़्सद-ए-दिल को पा के भी

حالت دل وہی رہی مقصد دل کو پا کے بھی

शायर: Kaif Moradaabadi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हालत-ए-दिल वही रही मक़्सद-ए-दिल को पा के भी
हम तो सुकूँ न पा सके उन के क़रीब जा के भी

इज़्न-ए-नज़ारा तो दिया जुरअत-ए-दीद छीन ली
वो कभी सामने न आए रुख़ से हिजाब उठा के भी

दिल है न ज़ौक़-ए-आरज़ू कोई तलब न जुस्तुजू
अब वो करेंगे क्या मुझे साहिब-ए-दिल बना के भी

पास-ए-रज़ा-ए-दोस्त को अहल-ए-वफ़ा से पूछिए
कुछ न ज़बाँ से कह सके उन का इशारा पा के भी

खुल गया राज़-ए-हाल-ए-दिल जब वो हरीम-ए-नाज़ में
हम से नज़र चुराईए सब से नज़र मिला के भी

यूँ भी इक इम्तिहाँ सही जज़्ब-ए-दरून-ए-इश्क़ का
कुछ दिनों देख लीजिए दिल से हमें भुला के भी

कम हुई क्या फ़सुर्दगी 'कैफ़'-ए-अलम-नसीब की
आप ने देख तो लिया बारहा मुस्कुरा के भी