उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gul-e-suKHan se andheron mein tab-kari kar

गुल-ए-सुख़न से अँधेरों में ताब-कारी कर

گل سخن سے اندھیروں میں تاب کاری کر

शायर: Idris Babar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गुल-ए-सुख़न से अँधेरों में ताब-कारी कर
नए सितारे खिला ख़्वाब-शार जारी कर

बस अब फ़क़ीर की दुनिया में और दख़्ल न दे
तिरी बिसात है दिल भर सो शहर-यारी कर

मैं कारोबार-ए-जहाँ को समेट कर आया
बस इतनी देर तो दिल की निगाह-दारी कर

यहीं कहीं किसी लम्हे में दिल भी है लर्ज़ां
तवज्जोह सारे ज़मानों पे बारी बारी कर

वही न हो कि ये सब लोग साँस लेने लगें
अमीर-ए-शहर कोई और ख़ौफ़ तारी कर

ये क़हत-ए-नूर तो 'बाबर' ख़बर नहीं कब जाए
सो दिल के अर्सा-ए-ख़ाली में ख़्वाब-यारी कर