उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gudaz-e-harf-e-nau-gufta yaqini hai mohabbat

गुदाज़-ए-हर्फ़-ए-नौ-गुफ़्ता यक़ीनी है मोहब्बत

گداز حرف نو گفتہ یقینی ہے محبت

शायर: Yawar Azeem7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गुदाज़-ए-हर्फ़-ए-नौ-गुफ़्ता यक़ीनी है मोहब्बत
तिरी बुनियाद पर शे'र-आफ़रीनी है मोहब्बत

दिल-ए-ख़ुश-फ़ह्‌म से इस बात पर अब कौन उलझे
जो कहता है कि तेरी हम-नशीनी है मोहब्बत

ग़मों को मुस्कुरा कर झेलना आता है तुझ को
तिरे औसाफ़ में ख़ंदा-जबीनी है मोहब्बत

तिरी क़ुर्बत में दिल शादाब होता जा रहा है
यही दिन हैं कि मुझ में भीनी-भीनी है मोहब्बत

हम अहल-ए-दिल के सब दा'वे ग़लत साबित हुए हैं
ग़म-ए-दुनिया ने आख़िर-कार छीनी है मोहब्बत

मोहब्बत की हदों को बस ख़ुदा ही जानता है
वरा-ए-सरहद-ए-रूह-उल-अमीनी है मोहब्बत

ये क्या दुहरी मुसीबत है मैं जिस में मुब्तला हूँ
दिल-ए-ईज़ा-तलब के साथ जीनी है मोहब्बत