उर्दू शायरी · ग़ज़ल

go ki thak-haar kar uDan chali

गो कि थक-हार कर उड़ान चली

گو کہ تھک ہار کر اڑان چلی

शायर: Kamal Hatvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गो कि थक-हार कर उड़ान चली
फिर भी वो सू-ए-आसमान चली

जो मुकम्मल हुई थी पल भर में
मुद्दतों तक वो दास्तान चली

दिल की मानें कि अक़्ल की मानें
ज़िंदगी भर ये खींच-तान चली

जाने वाले पलट के देख तो ले
पीछे पीछे हमारी जान चली

मौत जाने हुई है पास कि फ़ेल
ज़िंदगी दे के इम्तिहान चली

जंग सारी तुम्हीं को ले कर थी
ज़ेहन-ओ-दिल के जो दरमियान चली

उस ने ख़ामोश कर दिया मुझ को
जिस की ख़ातिर मिरी ज़बान चली