उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aankhen gain surur gaya lat chali gai

आँखें गईं सुरूर गया लत चली गई

آنکھیں گئیں سرور گیا لت چلی گئی

शायर: Kamal Hatvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आँखें गईं सुरूर गया लत चली गई
तुम क्या गए कि सारी ज़रूरत चली गई

तुम को पता है तुम से बिछड़ने पे क्या हुआ
हम को अकेला छोड़ के हिम्मत चली गई

बरसों जिसे कमाने में दिल ने लगा दिए
आँखों के रास्ते से वो दौलत चली गई

कल हम तलाश में थे कोई आइना मिले
अब आइना मिला है तो सूरत चली गई

अब छोड़िए भी कैसा मुनाफ़ा' कहाँ का सूद
इस कारोबार-ए-इश्क़ में लागत चली गई