उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab koi chaara-saz hai bhi nahin

अब कोई चारा-साज़ है भी नहीं

اب کوئی چارہ ساز ہے بھی نہیں

शायर: Kamal Hatvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस शीर्षक की यह संग्रह प्रविष्टि 2 है। समान शीर्षक के रिकॉर्ड में पाठ या श्रेय का अंतर है; इसे स्वतंत्र आधिकारिक संस्करण का दावा न मानें। अन्य संग्रह प्रविष्टि 1

अब कोई चारा-साज़ है भी नहीं
छोड़ो उम्र-ए-दराज़ है भी नहीं

सोचता हूँ बता ही दूँ सब को
अब तिरा राज़ राज़ है भी नहीं

मीर की इस ग़ज़ल में बस तुम हो
दूसरा नीम-बाज़ है भी नहीं

आप जब चाहें तोड़ सकते हैं
दिल पे अब मुझ को नाज़ है भी नहीं

ग़म ग़लत हो गए हों या मौला
वर्ना अब तो मजाज़ है भी नहीं

ज़िंदगी ख़ुद रियाज़ है अपना
और कोई रियाज़ है भी नहीं

चारा-साज़ो तसल्लियाँ कर लो
दिल में अब कोई राज़ है भी नहीं