उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghup andheron ki bad-gumani dekh

घुप अँधेरों की बद-गुमानी देख

گھپ اندھیروں کی بد گمانی دیکھ

शायर: Yasir Tahsin5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

घुप अँधेरों की बद-गुमानी देख
शब की चढ़ती हुई जवानी देख

दश्त कहता है पहले रक़्स करो
प्यास कहती है पहले पानी देख

क़ल्ब-ए-नाशाद की किवाड़ों पर
ज़ख़्म पिन्हा की पासबानी देख

एक किरदार मार कर मैं ने
मोड़ दी किस तरह कहानी देख

पड़ गए हैं नुजूमी हैरत में
आप का हुस्न-ए-कहकशानी देख