उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bhakt bole hai bhagwan to zahid kahe hai KHuda ja raha hai

भक्त बोले है भगवन तो ज़ाहिद कहे है ख़ुदा जा रहा है

بھکت بولے ہے بھگون تو زاہد کہے ہے خدا جا رہا ہے

शायर: Yasir Tahsin4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

भक्त बोले है भगवन तो ज़ाहिद कहे है ख़ुदा जा रहा है
रास्ते से हटो बेवुक़ूफो मिरा मै-कदा चल पड़ा है

इक नमाज़ी के चक्कर में मेरी नमाज़ें क़ज़ा हो रही हैं
बे-हया यार के दर के आगे मुसल्ला बिछा कर खड़ा है

कौन है ये दिवाना जिसे देख कर सब हँसे जा रहे हैं
कौन है जिस की ख़ुशबू ने इस शख़्स को बावरा कर दिया है

कौन-सी शय है ये जिस की जानिब को सब देखते डर रहे हैं
कुछ नहीं ये तो बस उन शरीफ़ों के किरदार का आइना है