उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apni wahshat pe bas nahin mera

अपनी वहशत पे बस नहीं मेरा

اپنی وحشت پہ بس نہیں میرا

शायर: Yasir Tahsin5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपनी वहशत पे बस नहीं मेरा
फिर भी दिल बुल-हवस नहीं मेरा

एक तेरी ही आस है मुझ को
और तुझ पे ही बस नहीं मेरा

कोई ख़्वाब-ए-चमन नहीं मुझ को
कोई बाब-ए-क़फ़स नहीं मेरा

एक ख़ाना-ख़राब हसरत के
और कुछ पेश-ओ-पस नहीं मेरा

ज़िक्र उस का न कर ख़ुदा के लिए
खींच तार-ए-नफ़स नहीं मेरा