उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghar to luTta hai magar hum ko miTane wale

घर तो लुटता है मगर हम को मिटाने वाले

گھر تو لٹتا ہے مگر ہم کو مٹانے والے

शायर: Aabid Jafri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

घर तो लुटता है मगर हम को मिटाने वाले
कौन से देस से लाएँगे ज़माने वाले

धूप बख़्शी है तो फिर साया-ए-दीवार भी दे
लोग सूरज को हैं मा'बूद बनाने वाले

दिल को आमादा-ए-तजदीद-ए-वफ़ा कैसे करूँ
रिस रहे हैं अभी नासूर पुराने वाले

यूँ तो मिलते हैं हर इक जिस्म पे बे-दाग़ लिबास
उठ गए दिल पे मगर दाग़ उठाने वाले

घर में घर की कोई सूरत तो निकालें 'आबिद'
आने वाले हैं कभी के नहीं आने वाले