उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghar lauT ke roenge man bap akele mein

घर लौट के रोएँगे माँ बाप अकेले में

گھر لوٹ کے روئیں گے ماں باپ اکیلے میں

शायर: Qaisarul Jafri4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

घर लौट के रोएँगे माँ बाप अकेले में
मिट्टी के खिलौने भी सस्ते न थे मेले में

काँटों पे चले लेकिन होने न दिया ज़ाहिर
तलवों का लहू धोया छुप छुप के अकेले में

ऐ दावर-ए-महशर ले देख आए तिरी दुनिया
हम ख़ुद को भी खो बैठे वो भीड़ थी मेले में

ख़ुशबू की तिजारत ने दीवार खड़ी कर दी
आँगन की चमेली में बाज़ार के बेले में