उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghazal ki aag qalam ki ghuTan barae-faroKHt

ग़ज़ल की आग क़लम की घुटन बराए-फ़रोख़्त

غزل کی آگ قلم کی گھٹن برائے فروخت

शायर: Lucky farooqi Hasrat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़ज़ल की आग क़लम की घुटन बराए-फ़रोख़्त
ये कौन रख गया ज़ेहनी थकन बराए-फ़रोख़्त

किताबें फेंक के ग़ुर्बत ने अपने हाथों से
ये लिख लिया है बदन पर बदन बराए-फ़रोख़्त

बंधे हुए हैं किसी रब्त-ए-ग़ैब से दोनों
बदन बराए-कफ़न है कफ़न बराए-फ़रोख़्त

उठा के रख दिए बाज़ार की पनाहों में
सुख़न-फ़रोश ने शेर-ओ-सुख़न बराए-फ़रोख़्त

ज़रूरतों ने जवाँ लड़कियों के माथे पर
ये गोद रक्खा है रख़्त-ए-बदन बराए-फ़रोख़्त

ये किस ने रख दिए मजबूरियों की मंडी में
कहीं पे जिस्म कहीं पैरहन बराए-फ़रोख़्त