उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghazal ke misra ko misra se joDa jata hai

ग़ज़ल के मिस्रा को मिस्रा से जोड़ा जाता है

غزل کے مصرع کو مصرع سے جوڑا جاتا ہے

शायर: Aadarsh Dubey7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़ज़ल के मिस्रा को मिस्रा से जोड़ा जाता है
तमाम रात ग़मों को निचोड़ा जाता है

पुराने जाल से बाहर निकलना मुश्किल है
इसी लिए तो रिवायत को तोड़ा जाता है

उतर गया हूँ तो अब जीतना ही मंज़िल है
यूँ हम से भी कहाँ मैदान छोड़ा जाता है

उठाना पड़ता है फिर हाथ गर नहीं सुधरे
हाँ पहली बार में हाथों को जोड़ा जाता है

यहाँ पे हिन्दू भी होंगे यहाँ मुसलमाँ भी
ये शाइरी है यहाँ सब को जोड़ा जाता है

दिखा दिया मिरे दुश्मन ने दोस्ती कर के
ग़ुरूर टूटा नहीं है तो तोड़ा जाता है

लिखा था नाम जहाँ तू ने ख़ून-ए-दिल से मिरा
वहीं से इश्क़ के काग़ज़ को मोड़ा जाता है