उर्दू शायरी · ग़ज़ल

garm yaadon ki rida sard ruton ki aawaz

गर्म यादों की रिदा सर्द रुतों की आवाज़

گرم یادوں کی ردا سرد رتوں کی آواز

शायर: Parwez Rahmani5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गर्म यादों की रिदा सर्द रुतों की आवाज़
भीगी आँखों की नवा सात सुरों की आवाज़

तिरछे सूरज ने सुनी साया-दराज़ी की दुआ
और ऊँची हुई कोताह-क़दों की आवाज़

तब कहीं जा के हुईं फिर मिरी झिलमिल पलकें
रेज़ा रेज़ा हुई जब शीशा-गरों की आवाज़

मेरे होंटों पे ख़मोशी का न कतबा लिखना
घट के रह जाएगी आवाज़-गरों की आवाज़

थी क़बीले में सहर-बंद निकलती कैसे
दायराती ही रही ख़ीरा-सुरों की आवाज़