उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gareban ko junun mein ta-ba-daman chaak hona tha

गरेबाँ को जुनूँ में ता-ब-दामन चाक होना था

گریباں کو جنوں میں تا بہ دامن چاک ہونا تھا

शायर: Jalal Lakhnavi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गरेबाँ को जुनूँ में ता-ब-दामन चाक होना था
जवाब-ए-जादा-ए-सहरा-ए-वहशत-नाक होना था

तग़ाफ़ुल के गिले सुन कर झुका लीं तुम ने क्यों आँखें
मिरे शर्मिंदा करने को ज़रा बेबाक होना था

निगाह-ए-गर्म की बिजली से जलना था मुक़द्दर में
किसी को आग होना था किसी को ख़ाक होना था

जो आँखें पूछतीं उस की तो दिल मेरा बता देता
यहाँ शर्मा के झुकना था यहाँ बेबाक होना था

तड़प दिल की दिखाना था 'जलाल' उन शोख़-चश्मों को
वहीं की बख़्त ने सुस्ती जहाँ चालाक होना था