उर्दू शायरी · ग़ज़ल

de sanam hukm tu dar par tere hazir ho kar

दे सनम हुक्म तू दर पर तिरे हाज़िर हो कर

دے صنم حکم تو در پر ترے حاضر ہو کر

शायर: Jalal Lakhnavi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दे सनम हुक्म तू दर पर तिरे हाज़िर हो कर
पड़ रहे कोई मुसलमान भी काफ़िर हो कर

चुटकियाँ लेने को बस रह चुके पिन्हाँ दिल में
कभी पहलू में भी आ बैठिए ज़ाहिर हो कर

जब्हा-साई का इरादा हो तो पहुँचा देगा
दर तक उस बुत के ख़ुदा हफ़िज़-ओ-नासिर हो कर

ग़ैर क्यों हम को उठाता है तिरी महफ़िल से
आप उठ जाएँगे बरख़ास्ता-ख़तिर हो कर

ढूँडते रह गए पहलू ही त'अज्जुब है 'जलाल'
हाल-ए-दिल उस ने न तुम कह सके शा'इर हो कर