उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gham uThane ke hain hazar tariq

ग़म उठाने के हैं हज़ार तरीक़

غم اٹھانے کے ہیں ہزار طریق

शायर: Dagh Dehlvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़म उठाने के हैं हज़ार तरीक़
कि ज़माने के हैं हज़ार तरीक़

ग़ैर के ज़िक्र पर नहीं मौक़ूफ़
जी जलाने के हैं हज़ार तरीक़

मेहरबानी की एक राह तो हो
गर सताने के हैं हज़ार तरीक़

दिल में आया हज़ार राह से ग़म
इस ठिकाने के हैं हज़ार तरीक़

उन को सौ-सौ बहाने आते हैं
हर बहाने के हैं हज़ार तरीक़

दी है मय उस ने ग़ैर को जूठी
मुँह लगाने के हैं हज़ार तरीक़

'दाग़' अब फ़ाक़ा-मस्त बन बैठे
माँग खाने के हैं हज़ार तरीक़