उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gham ne dilon ko ram kiya aur guzar gaya

ग़म ने दिलों को राम किया और गुज़र गया

غم نے دلوں کو رام کیا اور گزر گیا

शायर: Kaif Moradaabadi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़म ने दिलों को राम किया और गुज़र गया
ज़ालिम ने अपना काम किया और गुज़र गया

सय्याद कुछ तो ख़ातिर-ए-अहल-ए-वफ़ा करे
ये क्या असीर-ए-दाम किया और गुज़र गया

ऐ साक़ी-ए-बहार तिरे ज़ौक़ के निसार
हर गुल को एक जाम किया और गुज़र गया

आया था बुत-कदा भी मिरी राह-ए-शौक़ में
मैं ने तो इक सलाम किया और गुज़र गया

ये काएनात है कि किसी ने ब-सद हिजाब
इक ख़ास जल्वा 'आम किया और गुज़र गया

आया क़रीब 'कैफ़' कोई मस्त-ए-नाज़-ए-हुस्न
डाली नज़र ग़ुलाम किया और गुज़र गया